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Sunday, 8 September 2013

क्रिकेट-खेल या वर्चस्व की जंग???

महीनो पहले तय  हुए भारत-दक्षिण अफ्रीका  टेस्ट सीरीज से पहले दोनों देशो के क्रिकेट बोर्ड प्रमुख एन. श्रीनिवासन और हारुन लोर्गट के बिच हुए विवाद की वजह से भारत का दौरा 25 दिनों का घट  कर रह गया है।  प्रस्तावित सीरीज में ३ टेस्ट ७ ODI एवं २ T-20 मैच थे जबकि अब मुश्किल से २ टेस्ट और ३ ODI और एक T-20 मैच ही हो पायेगा जिससे दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट बोर्ड को अनुमानित $ 29 million का नुकसान  उठाना पड़ेगा।  

शायद यही वजह थी कि कल हारुन लोर्गट ने अपने अहंकार को धन के सामने बौना दिखा कर BCCI  के सेक्रेटरी संजय पटेल से फ़ोन पर बात कि और दुबई में होने वाले ICC के मुख्य कार्यकारी अधिकारियो की बैठक के बाद आपस में बैठ कर मसले को सुलझाने के लिए समय माँगा। इधर संजय पटेल ने कहा "मैंने  लोर्गट से बात की और हम आईसीसी की बैठक के दौरान चर्चा के लिए सहमत हुए।  लेकिन हम केवल 29 सितंबर को बीसीसीआई की वार्षिक आम बैठक के बाद दक्षिण अफ्रीका के दौरे के कार्यक्रम की पुष्टि कर सकते हैं, हमारे पास  केवल एक स्लॉट उपलब्ध  है और हम इस पर कुछ फैसला जरुर करेंगे " मतलब साफ़ है की BCCI अभी भी लोर्गट से सम्बन्ध बनाये रखने में कुछ खास दिलचस्पी नहीं दिखा रही है वैसे BCCI  की लोर्गट से मतभेद काफी पुराने है  2008 में हारुन लोर्गट के आईसीसी प्रमुख बनने के बाद कई मुद्दों पर उनके एवं BCCI के बिच असहमति थी  "लोर्गट ने बीसीसीआई की इच्छा के खिलाफ  निर्णय समीक्षा प्रणाली (डीआरएस) के लिए प्रेरित कर रहे थे, फिर बाद में  प्राइस वॉटरहाउस कूपर्स के साथ आईसीसी के मामलों की एक स्वतंत्र समीक्षा करने के लिए लोर्गट ने  लॉर्ड वूल्फ आयोग की स्तापना की जो  2011 के विश्व कप की स्वंतंत्र तरीके से जाँच करने के लिए बनी। यह  ताबूत का अंतिम कील साबित  हुआ और उसके बाद BCCI को कभी लोर्गट रास नहीं आये ।

जब हारुन लोर्गट दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष बने थे तभी BCCI  ने आप्पति जताई और जबाब में 
एक दक्षिण अफ्रीकी पत्रकार व  इंग्लैंड के पूर्व बल्लेबाज डेनिस कॉम्पटन के बेटे ट्वीट में CSA को बधाई देते हुए BCCI की  आप्पति जताने की बात पर कड़े शब्दों  में निंदा की।  और तब के बाद अब CSA की गर्दन BCCI  के पकड़ में आई है जिससे वो अपना पूरा हिसाब किताब बराबर करने में लगी है।  गौरतलब है की ICC के भविष्य दौरा कार्यक्रम के अंतर्गत भारत-दक्षिण अफ्रीका सीरीज नवम्बर में प्रस्तावित है लेकिन वेस्ट इंडीज के भारत आने के कारण ICC का केलिन्डर पूरी तरह से बेकार हो गया है जो की एक बार फिर से भारत का दबदबा सम्पूर्ण क्रिकेट जगत में स्तापित करता है देखना होगा की BCCI अपने नियमो पर ICC को चलता रहेगा अथवा हमेशा की तरह इसबार भी ICC  मात्र एक मूक दर्शक भर बन कर देखता रहेगा और "बाप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपैया "की तर्ज पर BCCI  की मनमानी चलने देगा। 

अब देखन होगा CSA  BCCI  की मांगों को मानता है या किसी बीच के निष्कर्ष पर दोनों देशो के बोर्ड पहुचते है, वैसे  दक्षिण अफ्रीका के दौरे रद्द कर दिया जाएगा ऐसी संभावना नहीं है  लेकिन अगर किसी निष्कर्ष पर नहीं पंहुचा गया तो निश्चित भारत T20s खेलने के लिए मना  कर सकता है  या यहां तक ​​कि एकदिवसीय मैचों की संख्या को कम कर सकता है। भारत 2010-2011 में पिछले दक्षिण अफ्रीका का दौरा किया था, तब  CSA   ने करीब 400 करोड़ रुपए का राजस्व हासिल किया था, इसबार भी CSA  कुछ ऐसा ही सोच रही थी मगर BCCI  ने उनकी मंशा को खटाई  में डालने का काम किया है।  


वैसे अगर देखा जाये तो BCCI  को कोई हक नहीं बनता इस तरह से फैसले लेने का और अगर कही ICC  भी IOC की तरह ताकतवर होती तो निश्चित ही वो भी IOA  की तरह BCCI  पर भी प्रतिबन्ध लगा देती मगर अफ़सोस ICC  तो BCCI  के रहमो करम पर चल रही संस्था है मगर देखना होगा की इस तरह के मनमाने फैसले के खिलाफ कोई आवाज कब तक नहीं उठती है और कब तक किसी एक  खास व्यक्तित्व के कारण  कब हम जैसे क्रिकेट के चाहनेवाले रोमांचक क्रिकेट से दूर रहेंगे। फ़िलहाल इन सब विवादों से दूर आने वाले वेस्ट इंडीज सीरीज में सचिन के 200 टेस्ट मैच का आनंद लेने के मूड में मै  हूँ , और आप भी हो ये आशा करता हूँ। 

अंशुमन श्रीवास्तव